रविवार, 4 अप्रैल 2021

मोहम्मद रफ़ी की गायक़ी

 #सुहानी_यादो_के_झरोखे_से


हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर में सिर्फ मुकेश जी और तलत मेहमूद का नाम हुआ करता था, तब रफी साहेब को ज्यादा लोग जानते नहीं थे ........लेकिन जब नौशाद ने फिल्म 'बैजू बावरा' के लिए रफी को मौका दिया तो उन्होंने कहा था की 'इस फिल्म के साथ ही, तुम सबकी जुबां पर छा जाओगे' और वही हुआ ......'.संगीतकार नौशाद अक्सर मोहम्मद रफ़ी के बारे में एक दिलचस्प क़िस्सा सुनाते थे एक बार एक अपराधी को फांसी दी जी रही थी उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई तो उसने न तो अपने परिवार से मिलने की इच्छा प्रकट की और न ही किसी ख़ास खाने की फ़रमाइश की उसकी सिर्फ़ एक इच्छा थी जिसे सुन कर जेल कर्मचारी सन्न रह गए उसने कहा कि वो मरने से पहले रफ़ी का 'बैजू बावरा' फ़िल्म का गाना 'ऐ दुनिया के रखवाले' सुनना चाहता है उस कैदी की अंतिम इच्छा पूरी की गई और एक टेप रिकॉर्डर मंगवा कर उसके लिए वह गाना बजाया गया ..........इस गाने  'ऐ दुनिया के रखवाले'  के लिए मोहम्मद रफ़ी ने 15 दिन तक रियाज़ किया था और रिकॉर्डिंग के बाद उनकी आवाज़ इस हद तक टूट गई थी कि कुछ लोगों ने कहना शुरू कर दिया था कि रफ़ी शायद कभी अपनी आवाज़ वापस नहीं पा सकेंगे ऊँचे सुर लगाने की वजह से उनके गले से खून तक आ गया था लेकिन रफ़ी ने उन लोगों को ग़लत साबित किया और भारत के सबसे लोकप्रिय पार्श्वगायक बने........ रफी साहब ने भारतीय भाषाओं जैसे असामी , कोंकणी , पंजाबी , उड़िया , मराठी , बंगाली , भोजपुरी के साथ-साथ उन्होंने पारसी, डच, स्पेनिश और इंग्लिश में भी गीत गाए थे.....मोहम्मद रफी साहेब जैसे दयालु  इंसान काफी कम ही होते हैं, वह कभी भी संगीतकार से ये नहीं पूछते थे कि उन्हें गीत गाने के लिए कितना पैसा मिलेगा. वह सिर्फ आकर गीत गा दिया करते थे और कभी-कभी तो 1 रुपये को लेकर भी गीत उन्होंने गाया है....माना जाता है की उन्होंने 26 हजार से ज्यादा गाने गाये है


मैं मानता हूँ कि उन्हें अपना हक़ नहीं मिला उन्हें इससे कहीं ज़्यादा मिलना चाहिए था मेरा मानना है की रफ़ी साहेब 'भारत रत्न ' के हक़दार थे उनको ये सम्मान मिलना चाहिए था शायद इसलिए नहीं मिला क्योंकि रफ़ी ने सम्मान पाने के लिए कभी लॉबिंग नहीं की....1967 में जब उन्हें पद्मश्री मिला तो उन्होंने कुछ समय तक सोचा कि इसे अस्वीकार कर दें, लेकिन फिर उनको सलाह दी गई कि  अगर आप ऐसा करते हैं तो सन्देश सही नहीं जायेगा आपको ग़लत समझा जाएगा और उन्होंने इस सलाह को मान लिया .. भारत सरकार कि तरफ से रफी साहेब को 'पद्म श्री' से सम्मानित किया गया .....6 फिल्मफेयर और 1 नेशनल अवार्ड रफी साहेब के नाम हैं


जिस दिन मोहम्मद रफी निधन हुआ उस दिन मुंबई में जोरों की बारिश हो रही थी और फिर भी अंतिम यात्रा के लिए कम से कम 10000 लोग सड़कों पर थे और उस दिन मशहूर एक्टर मनोज कुमार ने कहा...., '' सुरों की मां सरस्वती भी अपने आंसू बहा रही हैं ''


मशहूर गीतकार नौशाद ने मोहम्मद रफी के निधन पर लिखा था, 'गूंजती है तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों के गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपने मौसिकी पर साहब को फक्र होता है मगर ए मेरे साथी मौसिकी को भी आज तुझ पर है नाज...


हिंदी सिनेमा के सुरों के बेताज बादशाह 'मोहम्‍मद रफी साहेब ' की आज पुण्यतिथि है


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पवन मेहरा ✒


#ब्लॉग_सुहानी_यादें_बीते_सुनहरे_दौर_की.


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