मंगलवार, 11 अगस्त 2020

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय

 

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय

प्राचीन हिंदी विश्वविद्यालय

गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय भारत के उत्तराखण्ड राज्य के हरिद्वार शहर में स्थित है। इसकी स्थापना सन् १९०२ में स्वामी श्रद्धानन्द ने की थी। विश्वविद्यालय, हरिद्वार रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। लार्ड मैकाले द्वारा प्रतिपादित अंग्रेजी माध्यम की पाश्चात्य शिक्षा नीति के स्थान पर हिन्दी के माध्यम से भारतीय साहित्य, भारतीय दर्शनभारतीय संस्कृति एवं साहित्य के साथ-साथ आधुनिक विषयों की उच्च शिक्षा के अध्ययन-अध्यापन तथा अनुसंधान के लिए यह विश्वविद्यालय स्थापित किया गया था।

गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय
चित्र:Gurukul Kangri Vishwavidyalaya logo.jpg

आदर्श वाक्य:ब्रह्मचर्येण तपसा देवा मृत्युमपाघ्नत
(ब्रह्मचर्य-रूपी तप के द्वारा विद्वान्, ज्ञानी मृत्यु को दूर भगा देते हैं।)
स्थापित1902
प्रकार:सार्वजनिक विश्वविद्यालय
कुलाधिपति:डॉ सत्यपाल सिंह ( मुम्बई के पूर्व पुलिस कमिश्नर एवम् बागपत से सांसद )
कुलपति:प्रो. रूपकिशोर शास्त्री
विद्यार्थी संख्या:4000 से अधिक
अवस्थिति:हरिद्वारउत्तराखण्ड, भारत
परिसर:ग्रामीण, नगरीय
मुख्य रंग:केसरिया      और सफेद     
उपनाम:जीकेवी
सम्बन्धन:विश्वविद्यालय अनुदान आयोग
जालपृष्ठ:www.gkv.ac.in

इस विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य जाति और छुआ-छूत के भेदभाव के बिना गुरु-शिष्य परम्परा के अन्तर्गत् अध्यापकों एवं विद्यार्थियों के मध्य निरन्तर घनिष्ट सम्बन्ध स्थापित कर छात्र-छात्राओं को प्राचीन एवं आधुनिक विषयों की शिक्षा देकर उनका मानसिक और शारीरिक विकास कर चरित्रवान आदर्श नागरिक बनाना है।

जून 1962 में भारत सरकार ने इस शिक्षण संस्था के राष्ट्रीय स्वरूप तथा शिक्षा के क्षेत्र में इसके अप्रतिम् योगदान को दृष्टि में रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के एक्ट 1956 की धारा 3 के अन्तर्गत् समविश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) की मान्यता प्रदान की और वैदिक साहित्य, संस्कृत साहित्य, दर्शन, हिन्दी साहित्य, अंग्रेजी, मनोविज्ञान, गणित तथा प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्त्व विषयों में स्नातकोत्तर अध्ययन की व्यवस्था की गई। उपरोक्त विषयों के अतिरिक्त वर्तमान में विश्वविद्यालय में भौतिकी, रसायन विज्ञान, कम्प्यूटर विज्ञान, अभियांत्रिकी, आयुर्विज्ञान व प्रबन्धन के अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा स्थापित स्वायत्तशासी संस्थान ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद्’ (NACC) द्वारा मई 2002 में विश्वविद्यालय को चार सितारों (****) से अलंकृत किया गया था। परिषद् के सदस्यों ने विश्वविद्यालय की संस्तुति यहां के परिवेश, शैक्षिक वातावरण, शुद्ध पर्यावरण, बृहत् पुस्तकालय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के संग्रहालय आदि से प्रभावित होकर की थी। विश्वविद्यालय की सभी उपाधियां भारत सरकार/विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा मान्य हैं। यह विश्वविद्यालय भारतीय विश्वविद्यालय संघ (A.I.U.) तथा कामनवैल्थ विश्वविद्यालय संघ का सदस्य है।

इस विश्वविद्यालय के तीन परिसर हैं-

  1. मुख्य परिसर (हरिद्वार) - केवल लड़कों के लिए
  2. कन्या गुरुकुल महाविद्यालय हरिद्वार - केवल कन्याओं के लिए
  3. कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, देहरादून - केवल कन्याओं के लिए

कोई टिप्पणी नहीं:

टिप्पणी पोस्ट करें